यूपी पुलिस ने किया इनामी अपराधियों का खात्मा, कई गिरफ्तार
मार्च, 26 2026
पुलिस मुठभेड़: पिछले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश में पुलिस की कार्रवाई काफी तेज़ हो गई है। फरवरी 28, 2026 को आगरा में हुए सबसे बड़े दर्दनाक मामले में पवन अलीयस कल्लू, जो कि घाघियाबाद का रहने वाला एक 35 साल का इनामी अपराधी था, का शिकार हुआ। उसकी गर्दन पर 50,000 रुपये का इनाम लगा था। विशेष टास्क फोर्स (STF) और आगरा पुलिस ने मिलकर इसे ढूंढ निकाला।
परिस्थिति थोड़ी अजीब थी। पवन सिर्फ कोई सामान्य चोर नहीं था। वह रंदीप भाटी–अमित कसाना गैंग का शूटर माना जाता था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जेल में रहते हुए भी वह दूसरे गुंडों से लिंक बना रहा था। जब टीम उसके ठिकाने पर पहुंची, तो पानी की बोतल में खून बहा हो गया। उसने पुलिस पर 18-20 राउंड की रफ़्तार की, जबकि जवाबी अंदाज़ में पुलिस ने सिर्फ पांच गोलियां छोड़ीं।
गुप्त गतिविधियों का पर्दाफाश
ये मामला सिर्फ एक मुठभेड़ तक सीमित नहीं था। इसमें पुरानी बातें भी आईं। पता चला कि पवन के पास से एक गोवर्नमेंट-issued 9mm पिस्तौल मिला। ये हथियार कोई मामूली चीज़ नहीं थी। 2016 में बिहारख स्थित पुलिस स्टेशन में इससे पहले ही एक केस पंजीकृत हो चुका था। तब कॉन्स्टेबल मोनू धीमान के पास से यह हथियार छिन गया था। अब ये हथियार वहीं से वापस आया जहां से चोरी हुई थी।
डॉ. नवेन्दु कुमार, जो कि डीएसपी (STF) हैं, उन्होंने बताया कि पवन ने रिहाई के बाद अपने आप को फिर से संजो लिया। उनका दावा है कि इसने दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़े स्केल की दबिश चलाई थी।
सहारनपुर और बल्लिया में और कार्रवाइयाँ
कहानी यहीं नहीं रुकी। मार्च 1, 2026 की रात सहारनपुर में एक अलग ही खुलासा हुआ। नागल इलाके में पुलिस ने एक बाइक रोकी। गाड़ी नंबर प्लेट नहीं थी। जब पुलिस ने रुकने को कहा, तो ड्राइवर भागने लगा। राजकुमार चौहान, जो कि सब-इंस्पेक्टर (SHO) हैं, बताते हैं कि तब शूटर ने फायरिंग शुरू कर दी।
इस दौरान रगिब नाम का व्यक्ति गोली लगने पर गिरा। वह पैंडाओली गांव का रहने वाला था। उस पर गौवंश काटने और हथियार रखने के कई केस थे। दो अन्य साथी मौत के करीब से भागे।
फिर बात बल्लिया जिले की होती है। वहां तेंगर नात नाम के एक अपराधी को पकड़ा गया। उसकी गर्दन पर 25,000 रुपये का इनाम था। वह चोरी के कई मामलों में शामिल था। क्रिपा शंकर, जो कि एडीशनल सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (दक्षिण) हैं, ने सूचना के आधार पर हमला किया। अपराधी की पैर में गोली लगी और उसे अस्पताल भर्ती कराया गया।
भविष्य की चुनौतियां और सवाल
इन सभी मुठभेड़ों से एक निष्कर्ष निकलता है कि संगठित अपराध विभिन्न जिलों में फैला हुआ है। अगर आप सोच रहे हैं कि यह सिर्फ पुलिस की जीत है, तो रुको। इन अपराधियों के पीछे बड़े नेटवर्क हैं। हिमांशु भॉऊ गैंग जैसे समूहों से लिंक होने का इशारा मिल चुका है। पुलिस का कहना है कि ये कार्रवाइयां अभी खत्म नहीं हुई हैं।
गाज़ियाबाद में भी एक आपराधिक नेटावुक के खिलाफ एक्शन लिया गया जिसने एक यूट्यूबर पर हमला किया था। हालांकि उसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिली, लेकिन यह दिखाता है कि डिजिटल दुनिया और भूमिगत दुनिया कैसे जुड़ रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इन मुठभेड़ों का मुख्य कारण क्या था?
मुख्य कारण राज्य भर में बढ़ते संगठित अपराध और इनामी अपराधियों का बेरोजगारी करना था। पुलिस ने विशेष रूप से उन लोगों को निशाना बनाया जिन्होंने पहले से ही कई हत्या और extortion मामलों में संलिप्तता दिखाई थी।
पुलिस को कितने हथियार मिले?
मुठभेड़ के बाद पुलिस को देशी पिस्तौल और कारतूस मिले। सबसे चौंकाने वाली बात थी कि एक सरकार द्वारा जारी पिस्तौल मिली जो 2016 में एक constable के पास से लूटी गई थी। कुल मिलाकर कई हथियार जब्त किए गए।
क्या ये अपराधी किसी बड़े गैंग से जुड़े थे?
हाँ, जांच में पाया गया कि पवन अलीयस कल्लू रंदीप भाटी और अमित कसाना गैंग से जुड़ा था। इसके अलावा, जेल में उसने हरियाणा के हिमांशु भॉऊ गैंग से भी संपर्क बना रखा था।
आम जनता पर इसके क्या प्रभाव पड़ेंगे?
लोकसafety बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि कई सक्रिय अपराधियों को हटाने से दबंगी की संभावना कम हुई है। हालांकि, पुलिस को अभी भी उन अपराधियों की तलाश करनी है जो घटनाओं के दौरान भागने में कामयाब रहे थे।