सोने पर सरकारी कड़ी कार्रवाई: ड्यूटी बढ़ी, बैंकों को आयत से बाहर
जून, 21 2026
भारत में सोने के बाजार में एक बार फिर से हड़कंप मचा हुआ है। सरकार ने सोने की आयात नीति में ऐसे बदलाव किए हैं जो सीधे आम नागरिक की जेब और देश की अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित करेंगे। नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री ने न केवल आयात शुल्क में भारी वृद्धि की घोषणा की है, बल्कि बैंकों को सोना आयात करने की अनुमति भी रोक दी गई है। यह निर्णय विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को बचाने और रुपये की स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
आइए देखते हैं कि इस नीतिगत बदलाव का असर वास्तव में क्या होगा और क्या सोना सस्ता होने वाला है या महंगा?
सरकार का दोहरा प्रहार: ड्यूटी बढ़ोतरी और बैंकों पर प्रतिबंध
20 जून 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, सरकार ने सोने की आयात से जुड़े नियमों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 1 अप्रैल 2026 से कस्टम विभाग ने बैंकों को 'डेजिग्नेटेड इम्पोर्टर' के रूप में नोटिफाई करना बंद कर दिया है। इसका मतलब साफ है कि अब बैंक सोना आयात नहीं कर सकते।
इसके साथ ही, सरकार ने सोने पर लगने वाले आयात शुल्क (Import Duty) को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। यह दर संरचना में 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) शामिल है। यही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से भावुक अपील की है कि वे अगले एक साल तक सोना खरीदने से गریज़ करें ताकि देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को कम किया जा सके।
केवल तीन एजेंसियों को मिली अनुमति
बैंकों को आयात से बाहर रखने के बाद, सोने की आयात का रास्ता बहुत संकीर्ण हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब देश में केवल तीन एजेंसियों को ही सोना आयात करने की अनुमति है। इनमें से एक प्रमुख एजेंसी एमएमटीटीसी (MMTTC) है। हालांकि, अन्य दो एजेंसियों के नाम अभी स्पष्ट नहीं किए गए हैं। इस कदम से आयात का चैनल अधिक नियंत्रित हो गया है, जिससे सरकार आयात की मात्रा को सीमित करने में सक्षम होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम विदेशी मुद्रा के प्रवाह को रोकने और भारतीय रुपये को मजबूत करने के लिए रणनीतिक है। जब आयात कम होता है, तो डॉलर की मांग कम होती है, जिससे रुपये पर दबाव कम पड़ता है।
बजट की गुंजाइश: पहले सस्ते हुए थे भाव
हालांकि वर्तमान स्थिति तनावपूर्ण है, लेकिन कुछ समय पहले की घटनाओं को याद करना जरूरी है। केंद्रीय बजट में निरंजन सीतारमण, वित्त मंत्री ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क में भारी कटौती की थी। बेसिक कस्टम ड्यूटी 10% से घटाकर 5% की गई थी और एग्री सेश 5% से घटाकर 1% कर दिया गया था।
इस निर्णय का सीधा असर बाजार में दिखा। Navbharat Times की रिपोर्ट के अनुसार, बजट के बाद सोने की कीमतें 74,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर स्तर से गिरकर 67,400 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ गईं। यह मार्च के अंत के बाद का सबसे निचला स्तर था। LiveHindustan की रिपोर्ट में बताया गया कि इस कटौती के कारण सोने का भाव 70,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के नीचे आ सकता है और प्रति किलोग्राम स्तर पर लगभग 5.90 लाख रुपये तक सस्ता हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की संभावनाएं
इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के सचिव सुरेंद्र मेहता ने कहा था कि टैक्स कटौती का असर आम आदमी पर पड़ेगा और सोने की कीमतें गिर सकती हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि जीएसटी फिर से 3% से बढ़ाकर 12% किया जा सकता है, जो बाजार के लिए चिंता का विषय है।
हालांकि, हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सोने की खरीद में 70% की गिरावट दर्ज की गई है। यदि यह रुझान बना रहता है, तो आयात में कमी आएगी और व्यापार घाट कम होगा। लेकिन, 15% की उच्च ड्यूटी के कारण सोने की कीमतों में तेजी लौट सकती है, जिससे उपभोक्ताओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
Frequently Asked Questions
क्या बैंक अब सोना आयात कर सकते हैं?
नहीं, 1 अप्रैल 2026 से कस्टम विभाग ने बैंकों को 'डेजिग्नेटेड इम्पोर्टर' के रूप में नोटिफाई करना बंद कर दिया है। अब केवल तीन विशिष्ट एजेंसियों, जिनमें MMTTC शामिल है, को ही सोना आयात करने की अनुमति है।
सोने पर नया आयात शुल्क कितना है?
सरकार ने सोने पर प्रभावी आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। इसमें 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) शामिल है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोने की खरीद पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से अगले एक वर्ष तक सोना खरीदने से गरीज करने की अपील की है। इसका उद्देश्य देश के व्यापार घाटे को कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना है।
बजट में टैक्स कटौती के बाद सोने की कीमतें कैसे रही?
बजट में टैक्स कटौती के बाद सोने की कीमतें 74,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से गिरकर 67,400 रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ गई थीं। विशेषज्ञों का अनुमान था कि कीमतें 70,000 रुपये के नीचे जा सकती हैं।
सोने की आयात में कमी का देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?
सोने की आयात में कमी से विदेशी मुद्रा के प्रवाह पर नियंत्रण रहेगा, जिससे भारतीय रुपये की स्थिरता में मदद मिलेगी और व्यापार घाटा कम होगा। यह कदम दीर्घकालिक आर्थिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जा रहा है।