हिमाचल में रोबोटिक सर्जरी का इतिहास: AIIMS बिलासपुर ने किया पहला घुटने का ऑपरेशन
मई, 10 2026
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए यह एक ऐतिहासिक दिन था। AIIMS बिलासपुर ने हाल ही में राज्य की पहली सरकारी मेडिकल संस्था बनकर सफलतापूर्वक रोबोटिक सर्जरी (Robotic Surgery) करवाई है। इस प्रक्रिया में एक बुजुर्ग महिला मरीज को घुटने के गंभीर रोग और अर्थराइटिस से छुटकारा दिलाया गया। यह उपलब्धि केवल एक चिकित्सा सफलता नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि अब राज्य के निवासियों को उन्नत शल्य चिकित्सा के लिए महंगी निजी अस्पतालों या अन्य राज्यों में जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने सरकार द्वारा किए गए लगभग 3 करोड़ रुपये के निवेश को वास्तविक लाभ में बदल दिया है। आइए जानते हैं कि इस तकनीक ने कैसे काम किया और भविष्य में इसका क्या असर हो सकता है।
घुटने की सर्जरी: तकनीक और सटीकता
डॉ. गौरव कुमार शर्मा, ऑर्थोपेडिक सर्जन ने इस कठिन प्रक्रिया का नेतृत्व किया। उन्होंने बताया कि यह रोबोटिक घुटने का ट्रांसप्लांट ऑपरेशन लगभग दो घंटे में पूरा हुआ। यहाँ एक दिलचस्प बात यह है कि हालाँकि रोबोटिक सर्जरी में पारंपरिक विधियों की तुलना में लगभग 30 मिनट का समय अधिक लगता है, लेकिन इसकी सटीकता (precision) बहुत ऊंची होती है।
डॉ. शर्मा के अनुसार, "यह तकनीक उन छोटी-छोटी जटिलताओं को समाप्त कर देती है जो पारंपरिक सर्जरी में कभी-कभी देखी जाती हैं।" इसका मतलब है कि मरीज के लिए ठीक होने की संभावनाएं बेहतर हैं और रिकवरी का समय कम हो सकता है। वर्तमान में, AIIMS बिलासपुर के ऑर्थोपेडिक्स विभाग में ही यह 3 करोड़ रुपये की रोबोटिक सिस्टम स्थापित है, जो इसे क्षेत्र में एक अग्रणी केंद्र बनाता है।
प्रशिक्षण और तैयारी: ट्रक-ऑन-व्हील्स मोड
हर बड़ी उपलब्धि के पीछे अच्छी तैयारी होती है। AIIMS बिलासपुर ने इस तकनीक को अपनाने से पहले व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था। 7 मई 2026 को, यूरोलॉजी विभाग ने एक विशेष 'ट्रक-ऑन-व्हील्स' (Truck-on-Wheels) इकाई को अस्पताल परिसर में लाया था। यह मोबाइल डेमो यूनिट एम्बुलेंस ब्लॉक के सामने लगा था और इसमें अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी सिस्टम था।
दो दिनों तक चलने वाले इस अभियान में डॉक्टरों, रेजिडेंट्स, नर्सिंग ऑफिसर्स और OT स्टाफ को रोबोटिक आर्म कैसे काम करते हैं, यह सीखाया गया। डॉ. उमाकांत दुत्त, प्रमुख यूरोलॉजी विभाग ने इस प्रशिक्षण का आयोजन किया था। वे सभी स्टाफ को यह समझाया गया कि सर्जन कंसोल से मशीन को कैसे नियंत्रित करते हैं और कैसे रोबोटिक सहायता से जटिल प्रक्रियाएं की जा सकती हैं।
अधिकारियों का कहना: भविष्य की योजनाएं
AIIMS बिलासपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. दलजीत सिंह ने इस पहल को संस्थान के विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनकी टीम का लक्ष्य सिर्फ ऑर्थोपेडिक्स तक सीमित नहीं रहना है।
AIIMS बिलासपुर के चांसलर डॉ. राकेश कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि वर्तमान चरण केवल परिचय और प्रशिक्षण था, लेकिन यह रोबोटिक सर्जरी यूनिट स्थापित करने की ओर एक बड़ा कदम है। भविष्य में, इस तकनीक को यूरोलॉजी, जनरल सर्जरी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सर्जरी और गायनेकोलॉजी जैसे अन्य विभागों में भी लागू करने की योजना है।
मरीजों के लिए राहत: वित्तीय और मानसिक बोझ में कमी
सबसे बड़ा लाभ सीधे मरीजों को मिलेगा। पिछले कई वर्षों से, हिमाचल प्रदेश के मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली सर्जरी के लिए दिल्ली, चंडीगढ़ या अन्य बड़े शहरों में जाना पड़ता था। इससे न केवल पैसा खर्च होता था, बल्कि परिवारों को मानसिक तनाव भी झेलना पड़ता था।
अब जब AIIMS बिलासपुर इस सेवा को शुरू कर रहा है, तो स्थानीय निवासियों के पास अपने घर के पास ही विश्वस्तरीय सुविधाओं का विकल्प है। यह कदम स्वास्थ्य सेवा की पहुंच (accessibility) को बढ़ाएगा और मरीजों के वित्तीय बोझ को कम करेगा। यह साबित करता है कि सरकारी संस्थान भी निजी क्षेत्र के मुकाबले उन्नत तकनीक में पीछे नहीं हैं।
Frequently Asked Questions
AIIMS बिलासपुर में रोबोटिक सर्जरी की लागत क्या है?
AIIMS बिलासपुर के ऑर्थोपेडिक विभाग में स्थापित रोबोटिक सर्जरी सिस्टम की कुल लागत लगभग 3 करोड़ रुपये थी। यह एक सरकारी संस्था होने के नाते, मरीजों के लिए शुल्क सामान्य सरकारी दरों के अनुसार ही रहेगा, जिससे उन्हें महंगी निजी अस्पतालों की तुलना में काफी राहत मिलेगी।
कौन से विभाग रोबोटिक सर्जरी का उपयोग करेंगे?
वर्तमान में केवल ऑर्थोपेडिक विभाग इस तकनीक का उपयोग कर रहा है। हालाँकि, भविष्य की योजनाओं के अनुसार, यूरोलॉजी, जनरल सर्जरी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और गायनेकोलॉजी जैसे अन्य विभागों में भी रोबोटिक सर्जरी की सुविधाएं दी जाएंगी ताकि व्यापक शल्य चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
रोबोटिक सर्जरी और पारंपरिक सर्जरी में क्या अंतर है?
रोबोटिक सर्जरी में सटीकता (precision) बहुत अधिक होती है, जिससे छोटी जटिलताओं का जोखिम कम हो जाता है। हालाँकि, इसमें पारंपरिक विधियों की तुलना में लगभग 30 मिनट का समय अधिक लग सकता है, लेकिन मरीज के लिए ठीक होने की संभावनाएं बेहतर होती हैं और रिकवरी तेज़ हो सकती है।
क्या हिमाचल प्रदेश के बाहर के मरीज भी इसका लाभ उठा सकते हैं?
हाँ, AIIMS बिलासपुर एक क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र (Regional Center of Excellence) के रूप में विकसित हो रहा है। इसका मतलब है कि न केवल हिमाचल प्रदेश, बल्कि पड़ोसी राज्यों के मरीज भी उन्नत शल्य चिकित्सा के लिए यहाँ आ सकते हैं, बिना दिल्ली या अन्य बड़े महानगरों की ओर रुख किए।